होली नं0 - 8 (तुम तो भये तपवान कुंवर माथे पर गंगा जल धारे)
होली नं0 - 8
1 तुम तो भये तपवान कुंवर माथे पर गंगा जल धारे - 2
2 - भगीरथ राजा ने तपस्या कीन्ही ,
नित गंगा के काज कुंवर - माथे
3- बारह वरस तक तपस्या कीन्ही ,
तब ब्रह्मा जी आये कुंवर - माथे
4-ब्रह्मा जी आके राजा से बोले ,
क्या मन इच्छा होय कुंवर - माथे
5- ब्रह्मा जी आगे राजा खड़े हैं ,
बोले सिर को झुकाय कुंवर - माथे
6 - बार वरस तक तपस्या कीन्हीं ,
नित गंगा के काज कुंवर - माथे ।
7 - बेगवती गंगा धरती में आवें,
धरती में कौन समाय कुंवर - माथे
8 - तब राजा कैलाश गये हैं ,
शिव को ध्यान लगाय कुंवर - माथे
9 - एक बरस तक ध्यान लगाया ,
तब शिव दर्शन पाये कुंवर - माथे
10 - जा राजा गंगा को ले आ ,
इच्छा पूरण होय कुंवर - माथे
11 - हरि चरणों से गंगा निकली ,
शिव की जटा में समाय कंवर - माथे
12 - राजा सगर के पुत्र जो तारे ,
तारे साठ हजार कंवर - माथे
13 - आप तरे वा जग को तारे ,
तारे सब संसार कुंवर - माथे
14 - गंगोतरी हो के गंगा निकशी .
पहुंच गयी हरिद्वार कुंवर - माथे
15 - गंगा सागर से संगम कियो है ,
हो गई जै - जै कार कंवर - माथे
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