होली नं0 - 12 (विपत पड़ी महराज पाण्डू के सुत पाँचो भय्या)

होली नं0 - 12

1 - विपत पड़ी महराज पाण्डू के 
सुत पाँचो भय्या 

2 - कौरव पाण्डव जुवरा खेलें , 
सत युग को अवतार - पाण्डू - के - सुत
 
3- दो दल जुवरा खेलन लागे , 
दो दल पड़ गई रार - पाण्डू - के - सुत 

4- अरब - खरब सब धन को हारे , 
हारे कुन्ती को हार - पाण्डू - के - सुत 

5-हस्तिनापुर की थात को हारे ,
 हारे द्रोपती नारी पाण्डू - के - सुत 

6- द्रोपती जब दुष्टों ने घेरी , 
भये हैं कृष्ण सहाय - पाण्डू - के - सुत 

7 - राखी लाज करी ना देरी , 
कैसी लाज बचाय - पाण्डू - के - सुत 

8 - दुशासन को गर्व घटावै , 
द्रोपती चीर बढ़ाय - पाण्डू - के - सुत 

9 - लाख लीसा को घर बनवायो , 
वा में आग लगाय - पाण्डु - के - सुत 

10 - भीम भये हैं रसोया , 
नकुल जलाये चिराग - पाण्डु - के - सूत 

11 - युधिष्ठिर भये हैं जोगी , 
घर - घर भिक्षा लाय - पाण्डू - के - सुत

 12 - पहरेदार सहदेव भये हैं , 
अर्जुन गय्या ग्वाल - पाण्डु - के - सुत 

13 - लड़त - लड़त कौरव दल हारे , 
पाँण्डव राज चलाय - पाण्डू - के - सुत 
श्री कृष्ण कन्हय्या लाल की जै

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