होली नं0 - 35 (गिरीधर राज लियो कंसासुर को मथुरा)
होली नं0 - 35
1- अच्छ हाँरे गिरीधर राज लियो कंसासुर को
मथुरा पड़ गई भीड़ गिरीधर राज कियो कंसासुर को
2-हरी मथुरा में जन्म लियो , गोकुल दे पहुंचाय ,
गिरीधर खुले किवाड़े चौकड़ के सोवे
यशोदा लाल गिरीधर राज . . . . . . . . . .
3- घुगरू लगाये पैरन में , गैय्यन पिछै जाय गिरीधर
वन में जाय बिहार करे , सब ग्वालन के साथ ,
गिरीधर राज लियो कंसासुर
4- इधर उधर उतपात करे सब लड़कन के साथ गिरीधर बैठ पटक मटकिया फोड़ी , दही माखन को खाय - गिरीधर राज लियो . . .
5- एक कुवारी छूट पड़ी , पहुची यशोदा पास गिरीधर कुवर तुम्हारो दुष्ट बड़ो सब से करे विचपात
गिरीधर राज लियो . . . . . .
6-रस्सी ले के यशोदा गई आप खड़े भगवान गिरीधर रस्सी बांधी ऊदर में भयो दामोदर नाम
गिरीधर राज लियो . .
7- कंश पठाय विदुश्य कियो वृन्दावन को जाय गिरीधर कुशल रहे तो कान्हा की रैन गये विशराय
गिरीधर राज लियो . . . . . . . . . . .
8-वृन्दावन में रास रचो , मारी बन्शी की तान गिरीधर
राधा जी के कान पड़ी कागी बिरह की आग
गिरीधर राज लियो . . . . . . .
9 - सौ मन मदिरा मांग पियो द्वार खड़े गजराज गिरीधर
भुजा चली वल भट्टै की हस्ती छोडे चिगार
गिरीधर राज लियो . . . . .
10 - कंश को मार विधश्य कियो रानिन को समझाय गिरीधर
प्रजा को सुख होय . धरो संतन को भय दूर ।
गिरिधर राज लियो कंशासुर को
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