होली नं0 - 36 (हाँ जी उधो करमन की गति न्यारी है)
होली नं0 - 36
1- हाँ जी उधो करमन की गति न्यारी है ,
करमन करत पुकार ऊधो करमन की गति . . . ।
2 - हाँ जी ऊधो एक राजा के दो - दो कुवर थे ,
दो राजा दो योगी - ऊधो करमन . . .
3-हाँ जी ऊधो मुर्ख राजा ने राज कियो है ,
पण्डित भयो है भिखारी - ऊधो करमन . . . . . . .
4-हाँ जी ऊधो कहिये संन्देश श्याम सुन्दर से ,
तुम हो दीन दयाल - ऊधो करमन . . . . . . .
5-हाँ जी ऊधो गर्बन को तुम शेर वनो है ,
दुखियन को माई बाप - ऊधो करमन . . . . . . .
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