होली नं0 - 37 ( लागी गयो है बाण रानी)

होली नं0 - 37 
1- लागी गयो है बाण रानी 
दशरथ मछली छेदन में 

2-एक समय सुन रानी सयानी ,
 मृगया की मन ठानी रानी - दशरथ मछली . . . 

3- वन में जाय सरोवर देखा , 
बैठ किनारे जाय रानी - दशरथ मछली 

4- ताही समय श्रवण वहां पहुचे ,  
लेने निरमल नीर रानी - दशरथ मछली . . . 

5 - घड़ा डुबाया ज्यों ही जल में , 
शब्द घड़े का होय रानी - दशरथ मछली . . . 

6 - मृग आना जाना मन में , 
खीच के मारा बाण रानी - दशरथ मछली . . .

7 - श्रवणा कुंवर को बाण लगो है , 
हा - हा शब्द सुनाय रानी - दशरथ मछली . . . 

8 - ताही समय श्रवण वहाँ पहुचें , 
पूछा सारा हाल रानी - दशरथ मछली . . . . 

9 - मातु पिता का एक सहारा , 
लेने आया नीर रानी - दशरथ मछली . . . 

10 - जा के कहियो मातु पिता से , 
श्रवण मरी यो जाय रानी - दशरथ मछली . . . 

11 - पानी ले के दशरथ पहुचे ,
 बोले सारा हाल रानी - दशरथ मछली . . . 

12 - पुत्र वियोग में हम मरते हैं , सो दुख व्यापै तोही रानी - दशरथ मछली . . . 

13 - पुष्प विमान में तीनो बैठे , 
सीधे स्वर्ग को जाय रानी - दशरथ मछली . . .

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